नई दिल्ली | 5 अगस्त 2026
देशभर में बढ़ते साइबर फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक (RBI), बैंकों, वित्तीय संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मिलकर साइबर ठगी पर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठगी की रकम को जल्द से जल्द पीड़ितों तक वापस पहुंचाने और अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई जरूरी है।
अदालत ने विशेष रूप से 'म्यूल अकाउंट' (Mule Accounts) पर सख्ती बरतने को कहा। ये ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर ठग अवैध रूप से ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने RBI को इस संबंध में विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि साइबर अपराधों पर कार्रवाई तेज होने से रिपोर्ट किए गए मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साइबर ठगी के नए-नए तरीकों को देखते हुए और अधिक प्रभावी तकनीकी उपाय अपनाना आवश्यक है। अदालत ने मोबाइल फोन में 'किल स्विच' जैसी तकनीक लागू करने की संभावनाओं पर भी जल्द निर्णय लेने को कहा, ताकि चोरी या साइबर अपराध की स्थिति में डिवाइस का दुरुपयोग रोका जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को साइबर क्राइम हेल्पलाइन, जांच एजेंसियों और बैंकिंग सिस्टम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे ऑनलाइन ठगी के मामलों में पीड़ितों को शीघ्र राहत मिल सके।
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