कई दुकानों में बहुत कम या बिल्कुल भी स्टॉक नहीं होने की रिपोर्ट मिल रही है, जबकि ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स पर यह प्रोडक्ट अक्सर “अनुपलब्ध” दिखता है या बीच-बीच में ही दोबारा स्टॉक में आता है। इसके कारण उपभोक्ता कई दुकानों पर जाकर जांच कर रहे हैं या फिर कोक ज़ीरो जैसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
इस कमी का मुख्य कारण एल्युमिनियम कैनों की आपूर्ति में बाधा है, जिनका उपयोग भारत में डाइट कोक की पैकेजिंग के लिए मुख्य रूप से किया जाता है। वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं—खासकर कच्चे माल और शिपिंग रूट्स को प्रभावित करने वाली—इन कैनों के उत्पादन और वितरण को धीमा कर रही हैं। चूंकि डाइट कोक स्थानीय रूप से प्लास्टिक बोतलों में उतना उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस पैकेजिंग पर निर्भरता के कारण कमी अधिक स्पष्ट हो गई है।
साथ ही, कम और शून्य-शुगर वाले पेय पदार्थों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे पहले से ही सीमित सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। मुंबई के रिटेलर्स के अनुसार, जो भी स्टॉक आता है, वह जल्दी ही बिक जाता है, जिससे कम उपलब्धता का एक चक्र बन जाता है।
हालांकि कंपनियां वैकल्पिक सोर्सिंग और लॉजिस्टिक्स में सुधार के जरिए सप्लाई को स्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य कब होगी। फिलहाल यह कमी अस्थायी लगती है, लेकिन सप्लाई चेन की समस्याओं के हल होने की गति पर निर्भर करते हुए यह निकट भविष्य में जारी रह सकती है।
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